Santali language ol-chiki in indian constitution

Santali language ol-chiki  in indian constitution

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  Santali language ऑस्ट्रिक एशियाटिक भासा परिबार (Austric Asiatic language) का भासा है , जो सब से प्राचीन भासा है .
Santali language
Santali language writer

      इस भासा परिबार में कुल 168 सदस्य भासा है , ऑस्ट्रिक एशियाटिक भासा ही भारतीय संबिधान के 8 बी अनुसूची में दर्ज  है .

Santali language  दुनिया का एक प्राचीन भासा है . 

Santali language  दुनिया का एक प्राचीन भासा है . संताली भासा का अलग लिपि है जिसका नाम "Ol-Chiki" लिपि . गुरु गोमके Pandit Raghunath Murmu इस लिपि के अबिस्कारक है .
      भारत सर्कार दुयारा Santali language के लेखक को प्रत्येक
      साल केंद्रीय साहित्य एकाडेमी (kendriya sahitya academi) पुरस्कार प्रदान किया जाता है , उसके बाद लेखक  को समाज में भी नाम सम्मान दिया जाता है , कुछ लेखक ये सोचने लगते हे की वो अच्छे और काबिलियत लेखक है .
  कुछ उनसे भी अच्छे लेखक Santal Samaj में थे लेकिन उन्हें केंद्रीय साहित्य अकाडेमी पुरस्कार नहीं मिला है .
सबल ये है की गुरु गोमके पंडित Raghunath Murmu को केंद्रीय साहित्य अकाडेमी पुरस्कार कियु नहीं मिला है ? जबकि वो अच्छे लेखक और ऑल चिकि लिपि के अबिस्कारक है ,
   जिसके चलते आज हम गुरु गोमके को भगबान मानते है , अर्थात भगबान को भी साहित्य अकाडेमी  पुरस्कार नहीं मिला . गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू के दुयारा ऑल चिकि का निर्माण 1925 में हुआ था और केंद्रीय साहित्य अकाडेमी पुरस्कार देना 1955 से ही सुरु हुआ हे .
गुरु गोमके के समय में संताली भासा 8th अनु सूचि में शामिल नहीं था. इसलिए उन्हें पुरस्कार नहीं मिला . कुछ बात बताना चाहते हे की साहित्य अकडेमी पुरस्कार गुरु गोमके ऑल चिकि के कारन नहीं  बालकि  santali language 8 thअनुसूची में शामिल होने के कारन मिलता हे
  किसी भी जित को हासिल करने के लिए नेता , निति , राजनीती की जरुरत होता हे ,  कुछ लोगोको प्रयास से 22 दिसम्बर 2003 में संताली भासा संबिधान के 8th अनुसूची में शामिल हुआ .

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